कुछ बाते हम कह देते है , कुछ अच्छा कहते है , तो कुछ बुरा भी कहते है मैं ज्यादा नहीं सोचता जो होना है वो तो हो के ही रहना है , जिन्दगी में अगर कोई इंसान ऐसे दौर में है जो किसी मुसीबत या फिर मुसीबतों में घिरा है तो उसका मतलब ये नहीं है की वो कुछ कर नहीं पायेगा ! हर किसी की अपनी कहानी है , कुछ जल्दी और कुछ देरी से अपनी मंजिल तक पहुँचते है अब आप ये सोच रहे होंगे की मैं ये सब बाते भला आप से क्यों कर रहा हूँ , इसका भी एक कारण है , वो ये है कि छोटे से बड़े हम कब हो जाते है पता ही नहीं चलता , क्या मैं गलत हूँ ? मुझे नहीं लगता की मैं गलत हूँ, लेकिन मैंने बहूत से छोटे छोटे बच्चों को देखा , हाँ मैं बच्चों को पढ़ाता भी हूँ , लेकिन बहूत से बच्चों को सिर्फ येही मालूम है की बस होमवर्क करना है और स्कूल जाके अध्यापक को दिखाना और फिर उनको सब सुनाना है, वो वोही पड़ते है , जो उनको अध्यापक पढ़ाते है , विद्यार्थी कच्चे घड़े के समान होते है जेसा सिखाओगे वैसा वो समझेंगे ! ऐसा भी नहीं है सभी अध्यापक एक जैसे होते है लेकिन बहूत से ऐसे है जो सिर्फ वोही पढ़ाते है जो उनकी स्कूल की कितावो में लिखा होता है लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ उनकी बहूत कमजोर होती है बड़े बड़े शेहरो में तो चलता है लेकिन मैं चाहता हूँ कुछ छोटे छोटे शेहरो में भी बच्चे कुछ बड़ी सोच सोचे ! अमेरिका कुछ ख़ास नहीं अगर भारत के वातावरण में प्रैक्टिकल पढ़ाई ज्यादा करे ! अमेरिका और चीन इसी कारण हमसे आगे है , बच्चे प्रैक्टिकल में आगे बढ़ सकते है ! किताबे उनको वो नहीं बता सकती जो प्रैक्टिकल उनको बता सकता है ! मैं भी खुद इस बात को लेकर दुखी हूँ कि आज के समय में प्रैक्टिकल बहूत जरुरी है डिग्री किसी काम की नहीं अगर आपको डिग्री के बराबर काम नहीं आता ,मैं तो कोशिश करता हूँ की मुझसे जितना होगा मैं करूँगा ! बाकी उस रब की मेहर है जो वो चाहेगा वो होगा ! मेरी बिनती है उन तमाम टीचर और माताजी-पिताजी से कि वो अपने बच्चों पे सिर्फ किताबे पढ़ने का दबाब ना ढाले , उनको प्रैक्टिकल करने की सलहा भी दीजिये, जिससे वो दोनों चीज़े अच्छे से समझे और आपका और देश का नाम रोशन करे ! मैं भी कोशिश कर रहा हूँ की कुछ अच्छा हो जाये जिससे में अपनी लाइफ़ में कुछ करूँ ! अगर आपको अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग के साथ जुड़े रहिये दोस्तों :)
Friday, 29 January 2016
Need Of Practical Knowledge is Necessary For Survive In This Universe
कुछ बाते हम कह देते है , कुछ अच्छा कहते है , तो कुछ बुरा भी कहते है मैं ज्यादा नहीं सोचता जो होना है वो तो हो के ही रहना है , जिन्दगी में अगर कोई इंसान ऐसे दौर में है जो किसी मुसीबत या फिर मुसीबतों में घिरा है तो उसका मतलब ये नहीं है की वो कुछ कर नहीं पायेगा ! हर किसी की अपनी कहानी है , कुछ जल्दी और कुछ देरी से अपनी मंजिल तक पहुँचते है अब आप ये सोच रहे होंगे की मैं ये सब बाते भला आप से क्यों कर रहा हूँ , इसका भी एक कारण है , वो ये है कि छोटे से बड़े हम कब हो जाते है पता ही नहीं चलता , क्या मैं गलत हूँ ? मुझे नहीं लगता की मैं गलत हूँ, लेकिन मैंने बहूत से छोटे छोटे बच्चों को देखा , हाँ मैं बच्चों को पढ़ाता भी हूँ , लेकिन बहूत से बच्चों को सिर्फ येही मालूम है की बस होमवर्क करना है और स्कूल जाके अध्यापक को दिखाना और फिर उनको सब सुनाना है, वो वोही पड़ते है , जो उनको अध्यापक पढ़ाते है , विद्यार्थी कच्चे घड़े के समान होते है जेसा सिखाओगे वैसा वो समझेंगे ! ऐसा भी नहीं है सभी अध्यापक एक जैसे होते है लेकिन बहूत से ऐसे है जो सिर्फ वोही पढ़ाते है जो उनकी स्कूल की कितावो में लिखा होता है लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ उनकी बहूत कमजोर होती है बड़े बड़े शेहरो में तो चलता है लेकिन मैं चाहता हूँ कुछ छोटे छोटे शेहरो में भी बच्चे कुछ बड़ी सोच सोचे ! अमेरिका कुछ ख़ास नहीं अगर भारत के वातावरण में प्रैक्टिकल पढ़ाई ज्यादा करे ! अमेरिका और चीन इसी कारण हमसे आगे है , बच्चे प्रैक्टिकल में आगे बढ़ सकते है ! किताबे उनको वो नहीं बता सकती जो प्रैक्टिकल उनको बता सकता है ! मैं भी खुद इस बात को लेकर दुखी हूँ कि आज के समय में प्रैक्टिकल बहूत जरुरी है डिग्री किसी काम की नहीं अगर आपको डिग्री के बराबर काम नहीं आता ,मैं तो कोशिश करता हूँ की मुझसे जितना होगा मैं करूँगा ! बाकी उस रब की मेहर है जो वो चाहेगा वो होगा ! मेरी बिनती है उन तमाम टीचर और माताजी-पिताजी से कि वो अपने बच्चों पे सिर्फ किताबे पढ़ने का दबाब ना ढाले , उनको प्रैक्टिकल करने की सलहा भी दीजिये, जिससे वो दोनों चीज़े अच्छे से समझे और आपका और देश का नाम रोशन करे ! मैं भी कोशिश कर रहा हूँ की कुछ अच्छा हो जाये जिससे में अपनी लाइफ़ में कुछ करूँ ! अगर आपको अच्छा लगे तो मेरे ब्लॉग के साथ जुड़े रहिये दोस्तों :)
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😊✌️👌🏻
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