मैं कौन हूँ कहाँ से हूँ इसके बारे में मेरी प्रोफाइल आपको बहूत कुछ बता देगी ! शायद आप मुझे जानते भी होंगे ! हाल के ही दिनों में मैं बहूत उलझनों से जुलस रहा हूँ मैं ये नहीं जानता की क्यों ? मेरी जिन्दगी में बहूत से दौर आये है हलाकि अभी उम्र ही कुछ नहीं है लेकिन फिर भी अभी 23 साल तक मैंने जो भी देखा वो आप सब से साथ शेयर करने की इच्छा करता हूँ. मैंने जब अपने बचपन को देखा तो मुझे लगा शायद बचपन ऐसा भी हो सकता है जिसमे घर वाले 1 रुपया दे कर बोले की बेटा अब खुश है और मैं कहता हांजी ! लेकिन जैसे ही स्कूल में पहुचे तो सामने
वाला दोस्त कहता 1 रुपया कुछ भी नहीं है उसका तो कुछ नहीं आएगा ! एक वक्त ऐसा भी था जब 25-25-25-25 पैसे जोड़ कर एक रुपया बना लेते थे जैसे ही स्कूल के पास वाली आंटी जी दूकान लगाते थे तो मैं तुरंत उस आधी छूटी को उनके पास चला जाता था ! जैसे जैसे मैंने क्लास आगे की वैसे वैसे ही 25 पैसे का राज ख़त्म हुआ . मेरे गुलक में पड़े सुब 25 पैसे किसी काम के नहीं रहे ! आंटी जी ने भी मना कर दिया की बेटा इसका कुछ नहीं आता ! ये बात उस समय की है जब में प्राइमरी स्कूल का विद्यार्थी माना जाता था ! धिरे-धिरे मेरे दोस्त बने उन्होंने बहूत कुछ सिखाया . मैं पढ़ने मैं होशियार था ! इतना ज्यादा भी नहीं लेकिन ठीक-ठाक था ! लेकिन सरकारी स्कूल में पढता था तो कुछ अपशब्द भी सिख गया ! ये तो आज कल
आम बाते है ! लेकिन एक बात थी की मैंने हमेशा उनके सामने ही अपशब्द बोले जो उस तरह का इंसान होता जो उसे समझ पता हो और उस इंसान के सामने जो मेरी जिन्दगी में ग्रह के रूप में परवेश कर चूका हो ! बहूत सी बाते है जो समझने के लिए है ! आधी- छुट्टी में ज्यादातर हम कंचे(ब्लोएर) खेलते थे ! डीबी (खली माचिस के कवर) एक गोले में ढाल के वटे से मार कर बाहर निकालने पड़ते थे ! सच बोलूं जो मज़ा आज 23 साल की उम्र में नहीं मिल सकता वो मज़ा उन दिनों के कुछ उनचाहे खेल में था ! में और भी बहूत सी दिल की बात आपसे शेयर करूँगा ! मुझे किसी का दर नहीं है ! मैं जो सोचता हूँ कह देता हूँ. मुझे आशा है आपको मेरी जिन्दगी की पहली ये चंद बाते अच्छी लगी होगी ! तो आज की बातो को में विराम देता हूँ और आपका शुक्रियादा करना चाहूँगा जो आपने इससे देखा !
धन्यवाद
आपका प्रिय
कमल जीत
Wow...good job
ReplyDeleteThank you !
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